हरिद्वार पंचायत चुनाव में कई दावेदारों के टूट गए सपने,जानिए क्या कारण

हरिद्वार पंचायत चुनाव में कई दावेदारों के टूट गए सपने,जानिए क्या कारण

हरिद्वार में पंचायत चुनाव की तैयारी चल रही है लेकिन तमाम लोग बिना लड़े ही चुनाव की दावेदारी से बाहर हो गए हैं। कुछ सरकार द्वारा तय शैक्षिक योग्यता नहीं होने से लाचार हैं, तो कुछ के दो से अधिक बच्चे होने के कारण दावेदारी खटाई में पड़ गई है। इन लोगों की नजर अब परिवार के दूसरे सदस्यों पर टिकी है।
हरिद्वार जिले में फिलहाल पंचायत चुनाव की तैयारी हो रही है। प्रशासन जहां मतदाता सूचियों का अंतिम रूप दे रहा है, वहीं देहात में लोग सालों पहले से चुनाव लड़ने की भागदौड़ में जुटे हैं।
लेकिन चुनाव की नई नियमावली ने तमाम दावेदारों के सपने बिना चुनाव लड़े ही तोड़ दिए हैं। कर्णपाल सिंह, रणवीर सिंह ने बताया कि इस बार पंचायत चुनाव लड़ने के लिए सामान्य या पिछड़ा वर्ग के पुरुष को हाईस्कूल व महिला को आठवीं पास होना जरूरी है। शेष सभी वर्गों के लिए भी चुनाव लड़़ने की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता कक्षा आठ तय की गई है। इस योग्यता को पूरी न करने वाले चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। साथ ही इस बार दो बच्चों का कानून भी लागू हो गया है। 25 जुलाई 2019 के बाद जिन माता पिता का तीसरा बेटा या बेटी हुआ है, वे भी चुनाव के योग्य नहीं होंगे। सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जेधारक, सरकारी बकायादार, सहकारी समितियों के बोर्ड पदाधिकारी भी पंचायत चुनाव की दावेदारी नहीं कर पाएंगे जबकि बोर्ड के सदस्य चुनाव लड़ सकेंगे।बताया जा रहा है कि ऐसे लोग अब परिवार के दूसरे सदस्यों को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे हैं।

वही डीपीआरओ रमेश चन्द त्रिपाठी का कहना है कि न्यूनतम शैक्षिक योग्यता और दो बच्चों की बाध्यता इस बार पंचायत चुनाव में लागू होगी। दो बच्चों वाले प्रावधान की कट ऑफ डेट 25 जुलाई 2019 तय है। इससे पूर्व यदि किसी के दो से अधिक बच्चे हो चुके हैं, तो भी वे चुनाव लड़ सकते हैं।

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