हरिद्वार। अन्तर्राष्ट्रिय योगदिवस के अवसर पर श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, हरिद्वार में ऑनलाईन व्याख्यान गोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस गोष्ठी में डॉ. सन्दीप कुमार संस्कृत विभाग, एन-एस-कॉलेज, मेरठ, योगेश विद्यार्थी, प्रान्त संघटन मन्त्री, संस्कृत भारती, प्रो. मार्कण्डेय तिवारी, योग विभाग, लाल बहादुर शास्त्री केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली, प्रो. सुन्दर नारायण झा, वेद विभाग, संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली, प्रो. शिव शंकर मिश्र, दर्शन विभाग, डॉ. मंजुनाथ एस- जी, एसोसिएट प्रो. वेदान्तविभाग, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, वेदव्यास परिसर, बलाहर हिमाचलप्रदेश, डॉ. राजेश अधाना, उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, गुरुकुल काँगडी परिसर, हरिद्वार, डॉ. दीपक कुमार कोठारी, डॉ. आशिमा श्रवण, डॉ.
बी.के.सिंहदेव, डॉ. रवीन्द्र कुमार, डॉ. आलोक सेमवाल, मनोज कुमार, गौरव असवाल, डॉ. निरंजन मिश्र (महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य) आदि ने भाग लिया।
इस कार्यक्रम में बोलते हुए प्रो- मार्कण्डेय तिवारी ने योग शास्त्र के सैद्धान्तिक स्वरूप एवं प्रायोगिक स्वरूप का विशद विवेचन उपस्थापित किया और दोनों की उपयोगिता वर्तमान समाज के लिये कितना आवश्यक है, इस तथ्य को प्रकाशित किया। इससे समाज को वास्तविक में अपने स्वास्थ्य के साथ साथ समाज को स्वस्थ दिशा देने में लाभ मिलेगा। डॉ. सुन्दर नारायण झा ने वैदिक योगविज्ञान पर विशदतया प्रकाश डाला। योग विज्ञान के अनादित्व को भी सम्यक्तया प्रतिपादित किया। प्रो. शिवशंकर मिश्र ने आयुर्वेद के साथ योग विज्ञान की महत्ता एवं उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए समाज को इसे अपनाने के लिये प्रेरित किया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. निरंजन मिश्र ने आह्वान किया हम सभी आज के दिन एक प्रण लें कि हम अपने स्वास्थ्य को ठीक रखने एवं स्वयं को नियन्त्रित रखने के लिये योग शास्त्र के सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक दोनो पक्षों को अंगीकार करेंगे। इससे न केवल हमारा लाभ होगा अपितु स्वयं के लाभ के साथ-साथ समाज और राष्ट्र का हित होगा। डॉं. राजेश अधाना ने योग और आयुर्वेद के महत्व को बताते हुए कहा कि आज के इस कोरोना काल में देश ही नहीं अपितु विश्व के सभी लोगों ने योग को अपने जीवन में अपनाया है। आज योग एवं आयुर्वेद के विशेषज्ञों का यह कर्तव्य है कि वे आधुनिक बीमारियों और समस्याओं को देखते हुए नवीन खोज कर समाज के सामने उपस्थित करें। योग एवं आयुर्वेद के बिना भारतीय संस्कृति की पहचान असम्भव है। योगेश विद्यार्थी, प्रान्त संघटन मन्त्री, संस्कृत भारती ने कहा कि योग को अपनाकर हम अपने जीवन को सुदृढ बना सकते है। योग से ही हम भारतीय ज्ञान को आगे बढा सकते है। हमें जीवन में योग को अपनाना चाहिए।
