हरिद्वार। श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय हरिद्वार के व्याकरण विभाग में कार्यरत डॉ. रवीन्द्र कुमार की नियुक्ति को फर्जी व कूटरचित बताते हुए प्रो. सत्यदेव निगामलंकार गुरुकुल काँगडी विश्वविद्यालय ने उत्तराखण्ड हाईकोर्ट में एक केस WPSB 358 2021 दाखिल किया था। जो हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।

 

 

हरिद्वार। श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय हरिद्वार के व्याकरण विभाग में कार्यरत डॉ. रवीन्द्र कुमार की नियुक्ति को फर्जी व कूटरचित बताते हुए प्रो. सत्यदेव निगामलंकार गुरुकुल काँगडी विश्वविद्यालय ने उत्तराखण्ड हाईकोर्ट में एक केस WPSB 358 2021 दाखिल किया था। जो हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।

पिछले एक महीने से इस केस को दाखिल करने के लिये प्रो. सत्यदेव निरन्तर नैनीताल में जा रहे थे। यह केस 25 अगस्त को रजिस्ट्रार उच्च न्यायालय ने तथ्यों के अभाव में डिफेक्टिब में डाल दिया था। अन्त में 16 अगस्त को इस केस की सुनवाई आगे बड़ाई इस केस में प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने भारत सरकार , यू.जी-.सी., कुलपति केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली, कुलसचिव केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली, कुलपति उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार, कुलसचिव उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार, श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, प्रो. महावीर अग्रवाल, डॉ. भोला झा, डॉ. रवीन्द्र कुमार आदि को पार्टी बनाया था। डॉ. रवीन्द्र कुमार की नियुक्ति को लेकर प्रो. सत्यदेव निगमालंकार पिछले एक वर्ष से फर्जी व नियुमविरुद्ध बता रहे थे। इस विषय को लेकर उन्होंने भारत सरकार के कई विभागों में पत्रचार किया था। स्वयं महाविद्यालय के अध्यक्ष रहते समय प्रो. सत्यदेव ने डॉ. रवीन्द्र कुमार की व्यक्तिगत फाईल अपने कब्जे में ले ली थी, जो आज तक उनके कब्जे में है। इन्होंने डॉ. रवीन्द्र कुमार के विरुद्ध स्वयं प्रेसक्लब जाकर प्रेस कान्फ्रेन्स की थी।
20/ 9/ 21 को डॉ. सत्येदव निगमालंकार द्वारा किये गये केस की पहली ही तारीख थी। इस केस को स्वयं मुख्य न्यायाधीश राघवेन्द्र सिंह चौहान व न्यायाधीश आलोक कुमार वर्मा की बेंच सुन रही थी। बेंच ने प्रो. सत्येदव निगमालंकार के द्वारा किये गये केस पर पहले ही दिन तल्ख टिप्प्णी करते हुए खारिज कर वापिस कर दिया। कोर्ट ने 50000 पचास हजार का जुर्माना भी लगाया परन्तु उनके वकील के अनुनय करने पर कोर्ट ने माफ कर दिया।
कोर्ट के इस निर्णय पर पूर्व स्नातक परिषद् ने हर्ष व्यक्त किया और कहा कि पूर्व स्नातक परिषद् महाविद्यालय के विकास और सुरक्षा के लिये सदा संघर्ष करती रहेगी। परिषद् ने बताया कि यह कार्य प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने केवल ईर्ष्यावश ही किया था। प्रो. सत्यदेव ने गुरुजनों के सम्मान की बहुत हानि की है। इनके विरुद्ध शीघ्र कानूनी कार्यवाही की जायेगी।

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