कोरोनाकाल में कई कोरोना संक्रमितों को अपने ही दर्द दे रहे हैं। वे उनको अस्पताल में भर्ती कराने के बाद दोबारा हाल जानने के लिए भी नहीं पहुंच रहे

कोरोनाकाल में कई कोरोना संक्रमितों को अपने ही दर्द दे रहे हैं। वे उनको अस्पताल में भर्ती कराने के बाद दोबारा हाल जानने के लिए भी नहीं पहुंच रहे हैं। दून अस्पताल में ऐसे मामले सामने आए हैं। कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपनों से भी ऐसी परिस्थिति में मुंह मोड़ रहे हैं। स्थिति ये है कि कुछ लोग अपने परिजनों को सरकारी अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड तक लाने के बाद छोड़कर चले जा रहे हैं। बाद में अस्पताल द्वारा ऐसे लोगों का उपचार किया जा रहा है। मरीज के बताये मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर परिजनों से संपर्क भी नहीं हो पा रहा है।

केस 1: दून अस्पताल के अनुसार पिनौती रॉय कोलकता के रहने वाले थे। देहरादून में नौकरी करते थे। कुछ दिन पहले इनकी तबीयत खराब हुई तो परिजनों ने किसी की मदद से इन्हें दून अस्पताल में भर्ती करवाया। इसके बाद से किसी ने इनके बारे में जानने की कोशिश नहीं की। कुछ दिन बाद इनकी मौत हो गई। परिजनों को बताने के बावजूद शव लेने भी कोई नहीं आया।

केस 2:  दून अस्पताल के कोरोना वार्ड में पिछले कई  दिनों से लड्डू सरकार नाम के एक व्यक्ति भर्ती हैं। इनका उपचार लावारिस में चल रहा है। जानकारी के अनुसार शुरू के समय में एक दो-दिन लड्डू के हालचाल जानने के लिए एक व्यक्ति आता था। जो अब ना आता है ना ही कर्मचारियों को इस संबंध में फोन किया।

अस्पताल में ऑपरेशन के लिए आया मरीज संक्रमित निकला था। उसके परिजनों का पता नहीं चल पा रहा है। कुछ अन्य मरीज भी ऐसे हैं, जिनके परिजन नहीं आ पा रहे हैं। उनकी देखभाल अस्पताल कर्मचारियों द्वारा की जा रही है।

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