उत्तराखंड में एक 13 वर्षीय दलित नाबालिग बच्ची के साथ हुई गैंगरेप और हत्या की घटना ने न केवल इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि बीजेपी सरकार की कानून व्यवस्था और नारी सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहाँ पर मुख्य आरोपी आदित्य राज सैनी को सरकार के मंत्री व नेताओं का संरक्षण दलित की बेटी को अभी तक नहीं मिला न्याय
इस जघन्य अपराध का मुख्य आरोपी आदित्य राज सैनी न केवल अब तक कानून की गिरफ्त से बाहर है, बल्कि “बेटा बचाओ अभियान” जैसी मुहिम का चेहरा बनकर घूम रहा है। यह विडंबना नहीं तो और क्या है कि जिस व्यवस्था को बेटियों की रक्षा का संकल्प लेना था, वह अब आरोपियों की छवि बचाने में लगी है?
सूत्रों के अनुसार, पीड़ित बच्ची को बेरहमी से मारने और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप आदित्य राज सैनी और उसके साथियों पर है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि प्रशासनिक कार्रवाई में कोई गंभीरता नहीं दिखाई दे रही। पुलिसिया कार्रवाई सवालों के घेरे में है, और आरोपी खुलेआम संरक्षण पा रहे हैं।
कांग्रेस, सपा और अन्य विपक्षी दलों ने इस मामले पर बीजेपी सरकार की चुप्पी को ‘अपराधियों से मिलीभगत’ करार दिया है। सामाजिक संगठनों ने भी तीखा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि “यह मामला सिर्फ एक बच्ची की हत्या का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की हत्या का भी है।”
राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस बयान नहीं आया है, न ही आरोपी की गिरफ्तारी की कोई ठोस सूचना। इस बीच आदित्य राज सैनी को कुछ भाजपाई नेता खुले तौर पर समर्थन दे रहे हैं, जिससे यह सवाल और गहराता जा रहा है।
उत्तराखंड में एक 13 वर्षीय दलित नाबालिग बच्ची के साथ हुई गैंगरेप और हत्या की घटना ने न केवल इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि बीजेपी सरकार की कानून व्यवस्था और नारी सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहाँ पर मुख्य आरोपी आदित्य राज सैनी को सरकार के मंत्री व नेताओं का संरक्षण दलित की बेटी को अभी तक नहीं मिला न्याय
