श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में हुआ  भारतीय भाषा परिवार सम्मेलन का समापन।

श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में हुआ 

भारतीय भाषा परिवार सम्मेलन का समापन।

हरिद्वार। भारतीय भाषा  समिति के आर्थिक अनुदान से श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, हरिद्वार में  भारतीयभाषासम्मेलन से आज समापन किया गया। सरस्वतिवन्दना एवं अतिथियों के स्वागत से किया गया। सम्मेलन के प्रथम सत्र में भारतीय भाषाओं से सम्बन्धित शोधपत्रों का वाचन किया गया। सत्र की अध्यक्षता महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. भोला झा ने की। आपने अपने वक्तव्य में भारतीय भाषाओं के वैशिष्ट्य को उपस्थित करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा से ही समस्त भाषाएँ अनुप्राणित होती है। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव श्री गिरीश अवस्थी ने कहा कि जब तक सुसंस्कारित भाषा को व्यवहार में नहीं लायेंगे तब तक हम भावी सन्तति का उत्तम निर्माण नहीं कर सकते। श्री लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से मुख्यवक्ता के रूप में उपस्थित प्रो. मीनू कश्यप ने कहा कि भारतीय भाषाओं में निहित ज्ञान-विज्ञान के द्वारा ही भारत पुनः विश्वगुरु बन सकता है। भारतीय भाषाओं की वैज्ञानिकता पर प्रत्येक भारतीय को गर्व होना चाहिए। प्रसिद्ध उर्दू-साहित्यकार श्री अम्बर खरबन्दा ने कहा कि जिस भाषायी संस्कृति में हम जीवन यापन कर रहें हैं; उसका प्रचार-प्रसार करना भी हमारा नैतिक कर्त्तव्य है। लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से उपस्थित प्रो. परमानन्द भारद्वाज ने कहा कि जब तक देवभाषा संस्कृत जनसामान्य की भाषा थी; तब तक भारत विश्व का सिरमौर था। अतः हमें अपनी भाषा की महत्ता को समझना होगा और इसके संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु प्रयास करते रहना होगा। सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि मयराष्ट्र प्रान्त के सङ्घटनमन्त्री योगेश विद्यार्थी ने कहा की भारतीय संविधान में निहित भारतीय भाषाओं की अपनी-अपनी वैज्ञानिकता है; जो कि भारतीय ज्ञान परम्परा एवं समरसता की परिचायक है।

सम्मेलन के समापनसत्र का प्रारम्भ महाविद्यालय की प्रबन्धसमिति के अध्यक्ष प्रो. यशवीर सिंह की अध्यक्षता में हुआ। महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. रवीन्द्र कुमार ने सम्मेलन में उपस्थित सभी अतिथि हुआ का स्वागत किया। इस समापनसत्र में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रपतिसम्मान से सम्मानित अध्यात्मविद्यापीठ गुरुकुलीय विश्वविद्यालय, पिथौरागढ के कुलगुरु प्रो. वेद प्रकाश उपाध्याय रहें। विशिष्ट-अतिथि के रूप में दीपक कुमार गैरोला (संस्कृतसचिव, उत्तराखण्ड सरकार), पद्माकर मिश्र (सचिव, उत्तराखण्ड  संस्कृतशिक्षा परिषद्); राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान् डॉ. ओमप्रकाश भट्ट उपस्थित रहे; जिन्होंने भारतीय भाषाओं की वैज्ञानिकता पर अपने सारगर्भित व्याख्यान से सभी को लाभान्वित किया।  

सम्मेलन में मुख्यवक्ता के रूप में प्रो. सुरजीत सिंह, बी.एस.एम. पी.जी. कॉलेज रुडकी; डॉ. राजेश अधाना, पूर्व कुलसचिव, आयुर्वेद विश्वविद्यालय, प्रसिद्ध अन्तराष्ट्रिय प्रवक्ता डॉ. सतीश शास्त्री तथा हिन्दीभाषा सहायकाचार्य, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय उपस्थित रहे। सभी प्रवक्ताओं ने अपने-अपने सारगर्भित व्याख्यानों के द्वारा सभी को लाभान्वित किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. आशिमा श्रवण तथा सत्र सञ्चालन एम. नरेश भट्ट ने किया। 

समापनसत्र के अन्तिम चरण में महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. रवीन्द्र कुमार ने कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु सभी अभ्यागत महानुभावों, शोधार्थियों तथा आयोजकमण्डल का आभार प्रकट किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी उपस्थित रहें।

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