पशु चिकित्सालयों में पशुओं के इलाज के लिए 12 नंबर का टैग अनिवार्य।
लक्सर। देहरादून, हरिद्वार,जिले के पालतू पशुओं का डाटा पोर्टल पर ऑनलाइन किया जा रहा है केंद्र सरकार के पशु आधार पायलट प्रोजेक्ट के तहत देशभर में फिलहाल सिर्फ इन दो जिलों को ही इस योजना के लिए चुना गया है।
पशुओं का डाटा ऑनलाइन अपलोड हो जाने के बाद पशुपालकों के टोल फ्री नंबर पर सूचित किए जाने के बाद पशु चिकित्सक उनके घर पर ही पशुओ का इलाज करने पहुंचेंगे। इसके लिए सभी पशुपालकों को 12 अंकों का टैग पशुओं के कान पर लगवाना होगा।केंद्र सरकार ने पशु आधार पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। जिसके तहत हर पशुपालक का डाटा ऑनलाइन अपलोड किया जाना है। इसके लिए केंद्र सरकार ने पहले चरण में पूरे भारत में उत्तराखंड के हरिद्वार और देहरादून दो जिलों का चयन किया है। इस समय पशु चिकित्सालय की रिपोर्ट के अनुसार हरिद्वार जिले मैं 3,93,875 पालतू पशु है। डेटाबेस तैयार होने के बाद पशुपालकों को अपने पशुओं के इलाज और गर्भधारण के लिए पशु चिकित्सालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे पशुपालन विभाग के टोल फ्री नंबर पर एक कॉल करके अपना नाम और पता बताना होगा। इसके बाद मुख्यालय से मैसेज संबंधित केंद्र के पशु चिकित्सालय के पास जाएगा। संबंधित पशु चिकित्सक मैसेज पर प्राप्त पते पर पहुंचकर उसका इलाज करेगा।इसके बाद मैसेज में आए टोकन नंबर को पोर्टल पर डालकर जानकारी देख कर उसने पशुओं का इलाज कर दिया है साथ ही क्या ट्रीटमेंट कीया है इसकी जानकारी भी देनी होगी। जब पशु चिकित्सक टोकन नंबर पोर्टल पर नहीं डालेगा पशुपालक का आवेदन लंबित दिखाता रहेगा। 24 घंटे के अंदर टोकन नंबर पोर्टल पर नहीं डालने पर संबंधित चिकित्सक पर दोबारा मुख्यालय से कॉल आ जाएगी।
पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया की 10 गांव-गांव जाकर पशुपालकों को अवेयर किया जा रहा है व पशुओं के कान में 12 अंकों का टैग लगा रही है जिससे पोर्टल पर जानकारी उपलब्ध कराने में आसानी हो सके।
