हरिद्वार। ब्लड बैंक के दानवीर डॉक्टर खान का कोरोना से निधन हो गया

हरिद्वार। ब्लड बैंक के दानवीर डॉक्टर खान का कॅरोना से निधन

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आपको बताते चले कि हरिद्वार में ब्लड बैंक तो था लेकिन ब्लड ना होने की बाते रोज सुनने को मिला करती थी कारण जरुरतमंदों को इधर से उधर काफी दौड धूप करनी पडती थी फिर भी ब्लड कई बार नही मिल पाता था उसके बाद जनता को देहरादून ही जाना पड़ता था लेकिन जब वरिष्ठ पैथोलोजिस्ट डा. एसएन खान ने ब्लड बैंक की कमान संभाली तो कम संसाधनों के होते हुये भी ब्लड बैंक हरिद्वार उत्तराखण्ड का सबसे सफलतम ब्लड बैंक बनकर उभरा। यही नहीं हरिद्वार ब्लड बैंक से रूडकी और दूसरे इलाकों को ब्लड की आपूर्ति की जाती रही और कई बार देहरादून ब्लड को भी ब्लड मुहैया कराया गया। हरिद्वार ब्लड वॉलंटियर्स की एब बडी और मजबूत टीम बनाने और उनको प्रेरित करने में डा. खान का योगदान महत्वपूर्ण रहा। यही नही ब्लड बैंक के अलावा डा. खान ने जिला हरिद्वार और मेलाबहादराबाद ब्लड बैंक के दानवीर डॉक्टर खान का कॅरोना से निधन आपको बताते चले कि हरिद्वार में ब्लड बैंक तो था लेकिन ब्लड ना होने की बाते रोज सुनने को मिला करती थी कारण जरुरतमंदों को इधर से उधर काफी दौड धूप करनी पडती थी फिर भी ब्लड कई बार नही मिल पाता था उसके बाद जनता को देहरादून ही जाना पड़ता था लेकिन जब वरिष्ठ पैथोलोजिस्ट डा. एसएन खान ने ब्लड बैंक की कमान संभाली तो कम संसाधनों के होते हुये भी ब्लड बैंक हरिद्वार उत्तराखण्ड का सबसे सफलतम ब्लड बैंक बनकर उभरा। यही नहीं हरिद्वार ब्लड बैंक से रूडकी और दूसरे इलाकों को ब्लड की आपूर्ति की जाती रही और कई बार देहरादून ब्लड को भी ब्लड मुहैया कराया गया। हरिद्वार ब्लड वॉलंटियर्स की एब बडी और मजबूत टीम बनाने और उनको प्रेरित करने में डा. खान का योगदान महत्वपूर्ण रहा। यही नही ब्लड बैंक के अलावा डा. खान ने जिला हरिद्वार और मेला अस्पताल की लैब की जिम्मेदारी सालों तक सम्भाली इस दौरान जो भी उनसे मिला वो उनके सकारात्मक और करिश्माई शख्सियत को भूल नहीं पाया। डा. खान चौबीसों घंटे अपने काम के प्रति समर्पित और मदद के लिए उपलबध रहने वाले डॉक्टर थे जिनकी कार्यशैली से सरकारी सेवाओं के प्रति लोगों में विश्वास बनता चला गया। हालांकि डा. खान ने यूपी के सहारनपुर सरकारी अस्पताल में अपनी सेवाएं दी जहां उन्हें कोरोना ने जकड लिया। दिल्ली के एक अस्पताल में शनिवार देर रात उनका निधन हो गया। डा. खान की पत्नी बीएचईएल अस्पताल में कार्यरत हैं। जबकि उनकी बेटी दून मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रही हैं जबकि बेटा ग्रेजुएशन कर रहा है। अस्पताल की लैब की जिम्मेदारी सालों तक सम्भाली इस दौरान जो भी उनसे मिला वो उनके सकारात्मक और करिश्माई शख्सियत को भूल नहीं पाया। डा. खान चौबीसों घंटे अपने काम के प्रति समर्पित और मदद के लिए उपलबध रहने वाले डॉक्टर थे जिनकी कार्यशैली से सरकारी सेवाओं के प्रति लोगों में विश्वास बनता चला गया। हालांकि डा. खान ने यूपी के सहारनपुर सरकारी अस्पताल में अपनी सेवाएं दी जहां उन्हें कोरोना ने जकड लिया। दिल्ली के एक अस्पताल में शनिवार देर रात उनका निधन हो गया। डा. खान की पत्नी बीएचईएल अस्पताल में कार्यरत हैं। जबकि उनकी बेटी दून मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रही हैं जबकि बेटा ग्रेजुएशन कर रहा है।

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