हरिद्वार में महाकवि कविकुलगुरु कालिदास के मेघदूत काव्य की पंक्ति ‘‘आषाढस्य प्रथमदिवसे’ विषय को लेकर अखिलभारतीय संस्कृत विद्वद्गोष्ठी का आयोजन ऑनलाईन माध्यम से किया गया है।

हरिद्वार। आज श्री भगवानदास आदर्श संस्कृतमहाविद्यालय, हरिद्वार में महाकवि कविकुलगुरु कालिदास के मेघदूत काव्य की पंक्ति ‘‘आषाढस्य प्रथमदिवसे’ विषय को लेकर अखिलभारतीय संस्कृतहरिद्वार। आज श्री भगवानदास आदर्श संस्कृतमहाविद्यालय, हरिद्वार में महाकवि कविकुलगुरु कालिदास के मेघदूत काव्य की पंक्ति ‘‘आषाढस्य प्रथमदिवसे’ विषय को लेकर अखिलभारतीय संस्कृत विद्वद्गोष्ठी का आयोजन ऑनलाईन माध्यम से किया गया है।
महाकवि कालिदास विरचित मेघदूत खण्डकाव्य का आरम्भदिवस आषाढमास का पहला दिन कहा जाता है। आज आषाढ मास का पहला दिन है। अतः इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मेघदूत की ख्याति गीतिकाव्य के रूप है। इस काव्य को लेकर देश-विदेश में अनेक शोध हुए है। इस काव्य में कालिदास ने प्रकृति का मनोहर चित्रण किया है। यहॉं मेघ को दूत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस काव्य ने अनेक प्राचीन ऐतिहासिक तथ्यों को उजागर किया है। कवि मेघ के द्वारा नायक के सन्देश को नायिका तक प्रेषित करना चाहता है, इस विषय को कवि ने बहुत सुन्दररूप में साहित्यिकविधा से मनोहर बनाया है। इस कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. रमाकान्त शुक्ल (नई दिल्ली), राष्ट्रपति प्रो रहसबिहारी द्विवेदी (जबलपुर), राष्ट्रपति सम्मानित प्रो.वेद प्रकाश उपाध्याय
चण्डीगढ, अध्यक्ष महाविद्यालय प्रबन्ध समिति, प्रो. बनमाली विश्वाल निदेशक, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय रघुनाथकीर्ति परिसर, देवप्रयाग, प्रो. सुकान्त सेनापति निदेशक मुक्त स्वाध्याय पीठ केन्द्रीय संस्कृतविश्वविद्यालय दिल्ली, डॉ. नौनिहाल गौतम सागर विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश, डॉ. अरविन्द तिवारी बागपत उत्तरप्रदेश, डॉ. राजेन्द्र त्रिपाठी रसराज प्रयागराज उत्तरप्रदेश, डॉ. धर्मेन्द्र कुमार सिंहदेव प्राध्यापक केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, सदाशिव परिसर जगन्नाथपुरी उडीसा, योगेश विद्यार्थी प्रान्त संघटन मन्त्री हरिद्वार, डॉ. वेदव्रत संस्कृत विभाग गुरुकुल काँगडी विश्वविद्यालय हरिद्वार, प्रो. रंजु कुमारी, डॉ. देवराज, डॉ. निरंजन मिश्र (महाविद्यालय प्राचार्य) डॉ। बी.के.सिंहदेव, डॉ. रवीन्द्र कुमार, डॉ. आशिमा श्रवण, डॉ. आलोक कुमार सेमवाल, डॉ. दीपक कोठारी, आदि ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त सैकडों संस्कृत प्रेमियों व महाविद्यालयों के छात्रों ने गूगल मीट के लिंक द्वारा जुडकर इस कार्यक्रम से लाभ उठाया। विद्वद्गोष्ठी का आयोजन ऑनलाईन माध्यम से किया गया है।

महाकवि कालिदास विरचित मेघदूत खण्डकाव्य का आरम्भदिवस आषाढमास का पहला दिन कहा जाता है। आज आषाढ मास का पहला दिन है। अतः इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मेघदूत की ख्याति गीतिकाव्य के रूप है। इस काव्य को लेकर देश-विदेश में अनेक शोध हुए है। इस काव्य में कालिदास ने प्रकृति का मनोहर चित्रण किया है। यहॉं मेघ को दूत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस काव्य ने अनेक प्राचीन ऐतिहासिक तथ्यों को उजागर किया है। कवि मेघ के द्वारा नायक के सन्देश को नायिका तक प्रेषित करना चाहता है, इस विषय को कवि ने बहुत सुन्दररूप में साहित्यिकविधा से मनोहर बनाया है। इस कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. रमाकान्त शुक्ल (नई दिल्ली), राष्ट्रपति प्रो रहसबिहारी द्विवेदी (जबलपुर), राष्ट्रपति सम्मानित प्रो.वेद प्रकाश उपाध्याय
चण्डीगढ, अध्यक्ष महाविद्यालय प्रबन्ध समिति, प्रो. बनमाली विश्वाल निदेशक, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय रघुनाथकीर्ति परिसर, देवप्रयाग, प्रो. सुकान्त सेनापति निदेशक मुक्त स्वाध्याय पीठ केन्द्रीय संस्कृतविश्वविद्यालय दिल्ली, डॉ. नौनिहाल गौतम सागर विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश, डॉ. अरविन्द तिवारी बागपत उत्तरप्रदेश, डॉ. राजेन्द्र त्रिपाठी रसराज प्रयागराज उत्तरप्रदेश, डॉ. धर्मेन्द्र कुमार सिंहदेव प्राध्यापक केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, सदाशिव परिसर जगन्नाथपुरी उडीसा, योगेश विद्यार्थी प्रान्त संघटन मन्त्री हरिद्वार, डॉ. वेदव्रत संस्कृत विभाग गुरुकुल काँगडी विश्वविद्यालय हरिद्वार, प्रो. रंजु कुमारी, डॉ. देवराज, डॉ. निरंजन मिश्र (महाविद्यालय प्राचार्य) डॉ। बी.के.सिंहदेव, डॉ. रवीन्द्र कुमार, डॉ. आशिमा श्रवण, डॉ. आलोक कुमार सेमवाल, डॉ. दीपक कोठारी, आदि ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त सैकडों संस्कृत प्रेमियों व महाविद्यालयों के छात्रों ने गूगल मीट के लिंक द्वारा जुडकर इस कार्यक्रम से लाभ उठाया।

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