हरिद्वार मेजर जनरल सुधीर बहल कंसल्टेंट आईआरएस राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण भारत सरकार की अध्यक्षता में मंगलवार को आपदा प्रबन्धन की दृष्टि से आगामी चारधाम यात्रा व्यवस्था की तैयारियों के सम्बन्ध में ऑन लाइन के माध्यम से ओरियंटेशन एण्ड कोआर्डिनेशन कांफेंरस का आयोजन किया गया, मुख्य विकास अधिकारी प्रतीक जैन ने कलक्ट्रेट स्थित वीडियो कांफेंसिंग रूम से प्रतिभाग किया।

हरिद्वार मेजर जनरल सुधीर बहल कंसल्टेंट आईआरएस राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण भारत सरकार की अध्यक्षता में मंगलवार को आपदा प्रबन्धन की दृष्टि से आगामी चारधाम यात्रा व्यवस्था की तैयारियों के सम्बन्ध में ऑन लाइन के माध्यम से ओरियंटेशन एण्ड कोआर्डिनेशन कांफेंरस का आयोजन किया गया, मुख्य विकास अधिकारी प्रतीक जैन ने कलक्ट्रेट स्थित वीडियो कांफेंसिंग रूम से प्रतिभाग किया।
ओरियंटेशन एण्ड कोआर्डिनेशन कांफेंरस को सम्बोधित करते हुये मेजर जनरल सुधीर बहल ने बताया कि चारधाम यात्रा अप्रैल के तीसरे/चौथे सप्ताह से प्रारम्भ होकर दीपावली के आसपास तक संचालित होगी, जिसके मध्य में बरसात का मौसम भी रहेगा, इसको मद्देनजर रखते हुये आपदा प्रबन्धन की दृष्टि से आगामी चारधाम यात्रा व्यवस्था की तैयारियों के तहत 18 अप्रैल,2023 को टेबल टॉप एक्सरसाइज तथा 20 अप्रैल,2023 को मॉक एक्सरसाइज सम्बन्धित जनपद के डीईओसी में की जायेगी।
कंसल्टेंट आईआरएस राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण भारत सरकार ने कहा कि चारधाम यात्रा के लिये रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया प्रारम्भ हो चुकी है, लेकिन आपदा प्रबन्धन की दृष्टि से इसकी मॉनिटरिंग बहुत आवश्यक है, क्यांकि इसी के आधार पर हमें यात्रियों की संख्या आदि के सम्बन्ध में पूरी जानकारी प्राप्त होगी तथा उसी अनुसार स्टॉक आदि की व्यवस्थायें भी की जायेंगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य में श्रद्धालुओं के प्रमुख इण्ट्री प्वाइण्ट-हरिद्वार, कोटद्वार, देहरादून तथा चारों धामों के प्रमुख इण्ट्री प्वाइण्ट्स की निरन्तर मॉनिटरिंग होनी चाहिये ताकि किस स्थान पर किस तरह की आवश्यकतायें महसूस की जा रही हैं, उसी तरह की व्यवस्थायें तुरन्त सुनिश्चित की जा सकें। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा के दृष्टिगत एसओपी तथा मैप भी शीघ्रातिशीघ्र तैयार कर लेना चाहिये।
मेजर जनरल सुधीर बहल ने कहा कि चारधाम यात्रा रूट पर पूर्व में हुई विभिन्न घटनाओं का रिकार्ड भी हमारे पास होना चाहिये ताकि उन्हें चिह्नित करते हुये वहां पर मेडिकल इमरजेंसी, भूकम्प आने की संभावना सहित उसी तरह की व्यवस्थायें सुनिश्चित की जा सकें। उन्होंने रेडियो नेटवर्क, सटिलाइट फोन, कण्ट्रोल रूम आदि का जिक्र करते हुये कहा कि हमारा कम्युनिकेशन सिस्टम काफी मजबूत होना चाहिये तथा उसका एक प्लान जरूर तैयार कर लेना चाहिये। इसके साथ ही साथ जितनी भी एजेंसियां चारधाम यात्रा में कार्य करेंगी, उनका आपसी तालमेल बहुत अच्छा होना चाहिये। इसके अतिरिक्त कंसल्टेंट आईआरएस राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण भारत सरकार ने आपदा प्रबन्धन की दृष्टि से कई दिशा-निर्देश दिये।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी(वित्त एवं राजस्व)/मुख्य अधिशासी अधिकारी आपदा प्रबन्धन बीर सिंह बुदियाल, अपर जिलाधिकारी(प्रशासन) पी0एल0 शाह, परियोजना निदेशक डीआरडीए विक्रम सिंह, जिला विकास अधिकारी वेद प्रकाश, एआरटीओ सुश्री रश्मि पन्त, रत्नाकर, सीओ सुश्री निहारिका, आपदा प्रबन्धन अधिकारी सुश्री मीरा रावत, अधिशासी अभियन्ता लोक निर्माण सुरेश तोमर, अधिशासी अभियन्ता जल संस्थान मदन सेन, जिला पर्यटन अधिकारी सुरेश यादव सहित सम्बन्धित अधिकारीगण उपस्थित थे।

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