हरिद्वार महापौर पद हेतु ओ.बी.सी. वर्ग की मांग डा. नवनीत परमार ने शहरवासियों से निवेदन किया है कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता का अवसर प्रदान करता है।
जिसमें सबसे महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि गरीबी-अमीरी, स्त्री-पुरुष, व जाति-धर्म के भेदभाव को समाप्त करना है। मण्डल कमीशन की रिपोर्ट तथा मान्य उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुरूप पिछडी जातियों के धन कुबेरों को इस वर्ग के संवैधानिक अधिकारों पर डाका डालने से रोकने के लिये क्रीमीलेयर की व्यवस्था की गयी है; क्योंकि भारत के अन्दर पिछड़ी जातियों का मूल काम खेती करना है। यदि किसी व्यक्ति की आय कृषिकार्य के अतिरिक्त अन्य व्यवसाय से प्रतिवर्ष आठ लाख रुपये से अधिक है; तो वह व्यक्ति सामान्य श्रेणी में माना जायेगा तथा ओ.बी.सी. के आरक्षण का हकदार नहीं होगा।
यदि कोई व्यक्ति सीधे भारत सरकार या राज्य सरकार की ‘क्लास-वन’ की नौकरी पर भर्ती होता है; वह भी ओ.बी.सी. आरक्षण का लाभ प्राप्त नहीं कर सकता है। साथ ही यदि कोई व्यक्ति केन्द्रीय या राज्य सरकार की सीधी नौकरी में भर्ती होता है तथा 40 वर्ष या उससे पहले प्रमोशन पाकर क्लास-वन की नौकरी में आ जाता है तो वह भी ओ.बी.सी. आरक्षण का लाभ प्राप्त नहीं कर सकता है। इससे स्पष्ट है कि पिछडे वर्ग में धन कुबेरों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। विशुद्ध रूप से पिछड़े वर्ग की महिलाओं को ही आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। इसके विपरीत हरिद्वार नगर निगम में महापौर का पद ओ.बी.सी. महिला के लिये आरक्षित होने पर भी धन कुबेरों के जाल में सभी पार्टियाँ फंसती दिख रही हैं। जो परिवार सामान्य सीटों पर चुनाव लडते रहे हैं; उन्हें अभी भी येन-केन-प्रकारेण ओ.बी.सी. सीट पर चुनाव लडाने की तैयारी भी सभी पार्टियाँ कर रही हैं; जिससे संविधान की मूल भावना को चोट पहुँच रही है।
हम सब हरिद्वार शहरवासियों का कर्त्तव्य है की किसी भी प्रकार से कोई भी धन कुबेर किसी राजनैतिक दल से महापौर का पद खरीदकर भ्रष्टाचार करके हरिद्वार शहर की प्रगति को बाधित न कर पायें। मूल रूप से संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार अन्य पिछडा वर्ग की महिला को उसका अधिकार मिलना चाहिए। यदि ऐसा न हुआ तो ओ.बी.सी. वर्ग के लोग आन्दोलन कर ऐसे दलों का बहिष्कार करेंगे।
हरिद्वार महापौर पद हेतु ओ.बी.सी. वर्ग की मांग डा. नवनीत परमार ने शहरवासियों से निवेदन किया है कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता का अवसर प्रदान करता है।
