जिलाअधिकारी मयूर दीक्षित की भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम हो रही है सार्थक। मनरेगा जांच में बड़ा खुलासा: परिवहन विभाग का संविदा परिचालक बना मनरेगा मजदूर, ₹19,754 की राशि लौटाई। लोकपाल की कार्रवाई: ग्राम रोजगार सहायक और तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी पर ₹1-1 हजार का जुर्माना, बीडीओ नारसन को अनुपालन के निर्देश

जिलाअधिकारी मयूर दीक्षित की भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम हो रही है सार्थक।

मनरेगा जांच में बड़ा खुलासा: परिवहन विभाग का संविदा परिचालक बना मनरेगा मजदूर, ₹19,754 की राशि लौटाई।

लोकपाल की कार्रवाई: ग्राम रोजगार सहायक और तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी पर ₹1-1 हजार का जुर्माना, बीडीओ नारसन को अनुपालन के निर्देश

विकासखंड नारसन की ग्राम पंचायत पीरपुरा में मनरेगा कार्यों में अनियमितताओं की शिकायत पर हुई विस्तृत जांच में महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। उप जिला कार्यक्रम समन्वयक एवं जिला विकास अधिकारी के माध्यम से प्राप्त शिकायत पत्र के आधार पर लोकपाल, मनरेगा बीएस नेगी ने मामले की जांच कराई। शिकायत में ग्राम प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी एवं अन्य के विरुद्ध ग्राम पंचायत निधि और भूमि के दुरुपयोग, तालाब की मिट्टी के अवैध विक्रय तथा मनरेगा की धनराशि के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे।

जिसमें शिकायतकर्ताओं फिरोज, अकिल, तौकिर, राशिद, इकबाल सहित पांच ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि ग्राम पंचायत पीरपुरा में खसरा संख्या 2/7 स्थित तालाब की मिट्टी का अवैध रूप से विक्रय किया गया तथा मनरेगा के तहत फर्जी तरीके से भुगतान किए गए। साथ ही हरिद्वार डिपो में संविदा परिचालक के पद पर कार्यरत वसीम पुत्र इदरीश को मनरेगा मजदूर दर्शाकर मजदूरी का भुगतान किए जाने का भी आरोप लगाया गया।
लोकपाल मनरेगा ने अवगत कराया है कि उनके द्वारा मामले की जांच के लिए 29 मई 2026 को स्थलीय निरीक्षण एवं अभिलेखों का सत्यापन किया गया। जिसमें तकनीकी
जांच में अपर सहायक अभियंता लघु सिंचाई अरविंद कुमार भास्कर द्वारा सहयोग किया गया। शिकायतकर्ताओं ने मनरेगा से बनी सड़कों की गुणवत्ता जांच के लिए कोर कटिंग कराने की मांग भी उठाई गयी थी। लोकपाल ने स्पष्ट किया कि मनरेगा के वार्षिक मास्टर सर्कुलर-2024 के अनुसार पांच लाख रुपये से कम लागत वाले कार्यों के लिए कोर कटिंग का कोई प्रावधान नहीं है। जांच में संबंधित सभी कार्य पांच लाख रुपये से कम लागत के पाए गए।
जांच के दौरान वसीम ने स्वीकार किया कि उनसे त्रुटिवश मनरेगा के तहत भुगतान प्राप्त हुआ था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 के बाद उन्होंने मनरेगा के अंतर्गत कोई कार्य नहीं किया तथा लोकपाल कार्यालय की कार्यवाही के बाद प्राप्त पूरी ₹19,754 की धनराशि खंड विकास अधिकारी, नारसन के कार्यालय में राजकोष में जमा करा दी। उन्होंने भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न होने का आश्वासन देते हुए खेद भी व्यक्त किया।

लोकपाल मनरेगा ने अपने आदेश में कहा कि वसीम उसी अवधि में परिवहन विभाग के हरिद्वार डिपो में संविदा परिचालक के रूप में कार्यरत थे, फिर भी उन्हें मनरेगा मजदूर दर्शाकर भुगतान किया गया। भले ही संबंधित धनराशि वापस जमा करा दी गई हो, लेकिन यह मामला ग्राम पंचायत स्तर पर अभिलेखों के सत्यापन और जिम्मेदार अधिकारियों की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है, जो मनरेगा की पारदर्शिता और जवाबदेही के विपरीत है। प्रकरण में दोषी पाए जाने पर लोकपाल ने ग्राम पंचायत पीरपुरा के संबंधित ग्राम रोजगार सहायक पर गलत मस्टर रोल में उपस्थिति दर्ज कराने एवं गलत भुगतान की संस्तुति करने के लिए ₹1,000 तथा संबंधित तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी पर भी ₹1,000 का जुर्माना लगाया है। साथ ही खंड विकास अधिकारी, नारसन को निर्देश दिए गए हैं कि दंडादेश का नियमानुसार अनुपालन सुनिश्चित कर निर्धारित अवधि में इसकी आख्या लोकपाल कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।

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